Indian-flag-photos-HD-wallpapers-download-free-696x447,Savory crowded, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY-SA 4.0 | नंबर | शीर्षक |
|---|---|
| १. | १५ अगस्त कैसे मनाया जाता है? |
| २. | देश के तिरंगे ध्वज को बनाने और लहराने के नियम |
| ३. | १५ अगस्त क्यों मनाया जाता है औका इतना महत्रत्व क्यों है? |
| ४. | १८५७ का पहला विद्रोह |
| ५. | गांधीजी का आगमन |
| ६. | जलियावाला बाग़ हत्याकांड |
| ७. | भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी |
| ८. | सुभाषचंद बोस |
| ९. | दांडी कुच |
| १०. | भारत छोडो आन्दोलन |
Prime Minister Narendra modi's address to the nation on independence day,, By Prime minister'office,government of India, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY-SA 2. 15th august 3 flag hosting ceremony of independence day in Bhuj, By Prime Minister office, Government of India, image compressed and resized, Source is licensed by CC BY_SA 2.० १५ ऑगस्ट के दिन, सबसे पहले देश के राष्ट्रपति पुरे देश
को संबोधित करते है। राष्ट्रपति का संबोधन रेडियो और टीवी के दूरदर्शन चेनल में प्रसारित
किया जाता है। जो लगभग सभी प्राइवेट टीवी चेनले भी दिखाती है। प्रधान मंत्री लाल किल्ले
पे भारत का राष्ट्र ध्वज तिरंगा लहराते है। फिर देश के प्रधान मंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते है। उस दिन कई
वि.आई.पी.और सभी राजकीय पक्ष के नेता को आमंत्रित किया जाता है। प्रधान मंत्री के
भाषण का पुरे देश को इंतज़ार रहता है। प्रधान मंत्री के भाषण के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। २१ तोपों की सलामी
दी जाती है। उसके बाद सशस्त्र बल, अर्ध सशस्त्र बल, एन सी सी कैडेड परेड करती है। परेड को देखना एक सुनहरा अवसर जैसा होता है।
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* तिरंगा हंमेशा आयताकार होना चाहिए और उसका अनुपान ३:२ होना चाहिये। अशोक चक्र का कोई माप तय नहीं है मगर २४ तिल्लिया होना जरुरी होता है।
कोई भी जगह और कोई भी स्थिति में तिरंगा कही से फटा और गंदा नहीं होना चाहिए।
१५ ऑगस्ट क्यों मनाया जाता है और इसका इतना महत्व क्यों है?
भारत को गुलाम बनाने के षड्यंत्र की शुरुआत अंग्रेजो ने १६१९ में सूरत के पश्चिम–उत्तर तट पर चौकी बनाकर की थी। पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना की। फिर बोम्बे,कलकत्ता और मद्रास जैसे शहरो में व्यापार के लिए ऑफिसे खोल दी। व्यापार के बहाने,भारत के स्थानिक शासको से अपने संबंध को मजबूत कर दिया। जब अंग्रेजो ने सब शासको को अंदर अंदर लड़ते देखा तो इस परिस्थिति का बेहिसाब फायदा उठाया।
सब शासको की मज़बूरी का फायदा उठाकर १००/१५० सालो में अंग्रेजो ने अपना आधिपत्य भारत,पकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकांश भागो में स्थापित कर दिया। १८५७ में अंग्रेजो ने बंगाल के अंतिम नवाब को हराया। तब अंग्रेजो की साजिस खुल गई। अंग्रेजो ने यहाँ की प्रजा को लुटना चालू कर दिया था। किसानो को अपनी ज़मींन के अच्छे हिस्से पर इंडिगो की खेती करके कम भाव में अंग्रेजो को देनी पड़ती थी। किसानो से महेसुल इतना वसूल किया जाता था की किसान कर्ज़दार बन गया था।
आम जनता भी कर वसूली से परेशान थी। पुरे भारत की संपति लूटकर ब्रिटन भेजा जा रहा था। सिपाहियो को भी जबरजस्ती विश्व युध्ध में भेजा जा रहा था। अंग्रेजो की निति से पूरा देश परेशान था। इसलिए पुरे देश में अंग्रेजो के सामने विद्रोह हुआ।
१८५७ का पहला विद्रोह


British Forces Capture the rebel in 1857 near Kanpur, India, By Utkarsha Mohan, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY-SA 3.0
PM pays tribute to Sardar Vallabhbhai Patel on his Punya Tithi,Narendra Mody, Selva Rangam faved, image compressed and resized, source is licensed under CC BY-SA 2.0 Sikar-Kisan-Andolan (Sikar Farmer Movement) By Rcmandota, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY-SA 4.0पहला विश्व युध्ध २०१८ के पहले सप्ताह में समाप्त हो गया। ब्रिटन उसमे विजयी हुआ था। भारतीय सिपाहिओ ने बहोत ही अच्छा प्रदर्शन किया था। उस वक्त देश की हालत खराब थी। महगाई अपनी चरम सीमा पर थी। भारत ने ब्रिटेन को विश्व युध्ध में बहोत सहकार दिया था। इसलिए भारत को उम्मीद थी की अंग्रेज सरकार अब भारत को राहत देगी। युध्ध के दरमियान, सरकार का रुख काफी नरम था। मगर जैसे ही युध्ध समाप्त हुआ, फिर से ब्रिटेन ने अपना दमनकारी रूप दिखाना चालू कर दिया।

गांधीजी ने इसके खिलाफ "नॉन को-ओपरेटिव मूवमेंट" चालू की। जिसमे अंग्रेजो की सभी चीजो को जाहिर में जला दिया गया। सरकारी स्कूल में बच्चो ने जाना बंध कर दिया। सभी सरकारी कचहरी का विरोध किया गया। जलियावाला हत्या कांड की वजह से पूरा देश एक हो गया था। और लोग भी हिंसक होने लगे थे। इसलिए ४/४/१९२२ को चौरी-चौरा का किस्सा हुआ। गोरखपुर में जब पोलिस चोकी के सामने जमा हुए आन्दोलनकारी पे सरकार ने गोलिया चलाई तब आन्दोलनकारीओ ने पूरी पोलिस चोकी जला दी। जिस में २२ पोलिस मर गए। हिंसा होने के कारण गांधीजी ने यह आन्दोलन समाप्त कर दिया।


भगतसिंह और साथी को छुड़ा ने के लिए आम जनता में से बहुँत ही माफ़ी की अर्जी आने लगी। लोगो में आक्रोश फ़ैल गया। इसे देखकर,सरकार ने जो फांसी २४/३/१९३१ के बजाय २३/३/१९३१ को शामको ७.३१ को चुपचाप दे दी। इस प्रकार भगत सिंह,सुखदेव थापसर और शिवरामन राजगुरु अपने देश पर युवा अवस्था में ही शहीद हो गये।
सुभाष चंद्र बॉस
Bundesarchiv Bild 110111-Alber-064-22A, Subhas Chandra Bose bei Heinrich Himmler, By Alber, Kurt, image compressed and resized, Source is licensed u CC BY-SA 3.0DE दुसरे विश्व युध्ध के दौरान,जर्मनी चले गए। १९४३ में,वहा से सिंगापूर में "इंडियन नेशनल आर्मी" के पद पर रहे। जापान और जर्मनी की मदद से "आज़ाद हिन्द फ़ौज" की रचना की। इस आर्मी की मदद से उन्हों ने भारत के आंदामान–निकोबार द्वीप समूह, मणिपुर, नागालैंड में जीत हासिल की। मगर जर्मनी और जापान की दुसरे विश्व युध्ध में हार के बाद पीछे हटाना पडा। नेताजी के नारे ने युवको में नया जोश भर दिया था। वह नारा था "तुम मुझे खून दो, मै तुम्हे आज़ादी दूंगा"
Rejecting British -made cloth /Mahatma Gandhi, By Kandukuru nagarjun, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY 2.0 Dandi Salt March/Mahatma Gandhi Sabarmati Ashram, Ahmedabad, By Kandukuru Nagarjun, image compressed and resized, Source is licensed under CC BY 2.0
दुसरे विश्व युध्ध के बिच, भारत छोडो आन्दोलन का नारा, गांधीजी ने ९ अगस्त १९४२ को मुंबई अधिवेशन में दिया था। गांधीजी को तुरंत गिरफ्तार किया गया। लेकिन इस वक़्त पूरा देश आन्दोलन के साथ जुड़ गया था। भारत के युवाओ ने पुरे देश में हड़ताल और तोड़फोड़ से आन्दोलन चलता रहा। गांधी का नारा "करो या मरो" को सार्थक करते रहे। लाल बहादुर शास्त्री ने भी "मरो नहीं मारो" का नारा देकर युवाओ में नया जोश भर दिया। गांधीजी और सरोजिनी नायडू को येरवडा के आगाखान पेलेस में, पटना जेल और अहमद नगर जेल में, इस तरह देश की विभिन्न जेलों में डालकर अलग कर दिया गया। आंदोलन फिरभी चलता रहा। मगर गांधीजी जेल में जाते ही इस आन्दोलन में करीब ६०,००० लोग गिरफ्तार हुए। करीब ९०० लोग मारे गए।

माउन्ट बटन की नियुक्ति, नए वाइसरॉय के पद पर हुई तो आज़ादी की बात को अंतिम रूप दिया गया। मगर हिन्दू मुस्लिम लीग को एक करने में विफलता मिली। तब १५ अगस्त को आज़ादी का दिन नक्की किया गया। मगर देश के विभाजन का भी फैसला किया गया।
इस तरह आज़ादी मिली। मगर देश के दो टुकड़े में बट गया।
इस तरह २०० साल के संघर्ष, हजारो मातृभूमि के चाहनेवालो युवाओ के बलिदान से आज़ादी मिली है। जिसमे अगिनत माताओने अपने बेटो और अगिनत सुहागनों ने अपने पतिओ की आहुति दी है। तब जाकर आज़ादी मिली है। इसलिए १५ अगस्त का महत्त्व है।
मेरा भारत महान
१. गणेश चतुर्थी २. पर्युषण पर्व
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